हकीकत, परछाईं और प्रतिबिंब

इस रविवार की शाम हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। बाहर का आसमान धुंधला था, हवा में थोड़ी ठंडक थी और जैसे सब कुछ अपनी रफ्तार थोड़ी धीमी कर चुका था। मैं चाय का कप हाथ में लिए चुपचाप बैठा था। कोई खास काम सामने नहीं था, शायद इसलिए मन भी खुला हुआ था और इधर-उधर … Continue reading हकीकत, परछाईं और प्रतिबिंब