अब मंज़िल नहीं

एक और शांत रविवार की शाम थी। मैं अपने साथ बैठा था और अपने विचारों को बिना किसी दिशा में धकेले, अपने आप बहने दे रहा था। उस दिन कुछ असाधारण नहीं हुआ था, फिर भी मन में एक सीधा-सा प्रश्न आया, जीवन में गति क्या है? पहले मैंने गति को उसी तरह समझने की … Continue reading अब मंज़िल नहीं