रौशनी के पल

आज रविवार की शाम है। कल दीवाली है। मैं अपने कमरे में शांति से बैठा हूँ और यूँ ही पुरानी यादों में चला गया हूँ। ज़िंदगी के पिछले साठ सालों की दीवालियाँ मेरी आँखों के सामने जैसे एक-एक करके जलती हुई दीयों की तरह चमक उठी हैं। कुछ तेज़ रौशनी वाली, कुछ हल्की, कुछ बहुत … Continue reading रौशनी के पल