गहरी नींव

आज सुबह, जनवरी के आखिरी दिनों की ठंड – बारिश के बाद वाली वही गीली सर्दी – ने मेरे अंदर कुछ चुपचाप सा हिला दिया। जैसे हवा ने पुराने पन्ने पलट दिए हों। मैं समय में पीछे चला गया, और अपनी क्लिनिकल यात्रा को एक अलग ही नज़र से देखने लगा – कदम दर कदम, … Continue reading गहरी नींव