बिना किसी सपने या महत्त्वाकांक्षा के

मुझे ठीक-ठीक याद नहीं कि ये सोच मेरे मन में कब आई — शायद ये कभी शुरू ही नहीं हुई, शायद ये हमेशा से कहीं अंदर चुपचाप सोई हुई थी। लेकिन हाल ही में, जैसे किसी शांत तालाब में एक लहर उठती है, वैसे ही ये सोच उभर कर सामने आई और मुझसे एक सवाल … Continue reading बिना किसी सपने या महत्त्वाकांक्षा के