धीमे से खिलना

पिछले हफ़्ते होम्योपैथी के कुछ छात्र मुझसे मिलने आए। उनकी आँखों में चमक थी, उत्साह था, और हाथों में सवालों से भरी कॉपियाँ थीं। लेकिन उस उत्साह के नीचे एक और चीज़ साफ़ महसूस हो रही थी—बेचैनी। वे अपने करियर को लेकर चिंतित थे, अपने भविष्य को लेकर परेशान थे, और यहाँ तक कि शुरुआती … Continue reading धीमे से खिलना