बिना पछतावे के

कभी-कभी ज़िंदगी चुपचाप एक आईना सामने रख देती है। ना कोई शोर, ना कोई एलान — बस चुपचाप। और वो आईना चेहरा नहीं दिखाता, बल्कि वो फैसले दिखाता है जो ज़िंदगी में लिए गए। आप रुकते हैं। सोचते हैं। सिर्फ़ वो रास्ते नहीं दिखते जो आपने अपनाए, बल्कि वो भी जो कभी छोड़े गए। वो … Continue reading बिना पछतावे के