मन का करघा (प्रस्तावना)

एक छोटे से गाँव में नदी किनारे एक साधारण बुनकर रहता था। उसका जीवन सरल था और बातें बहुत ज्ञान से भरी होती थीं। वह दिनभर करघे पर बैठकर गाँव वालों के लिए कपड़ा बुनता। लोगों को उसके कपड़ों में कुछ खास दिखता था, ऐसा लगता जैसे उसमें कुछ गहरा अर्थ छिपा हो, जो सिर्फ … Continue reading मन का करघा (प्रस्तावना)