सिर्फ देने

ये जुलाई 2001 की एक आम सी शाम थी, दिल्ली की वैसी शाम जो बारिश से पहले ही भीगी मिट्टी की खुशबू से भर जाती है। बादल आसमान पर छाए हुए थे, और हल्की-सी शरारती हवा चल रही थी — जैसे शहर को बता रही हो कि मानसून बस आने ही वाला है। शाम के … Continue reading सिर्फ देने