जीवन की नई परिभाषा

सुबह की नरम धूप मेरे कमरे की कांच की खिड़की से छनकर फर्श पर सुनहरी आकृतियाँ बना रही थी। मैं चाय का कप हाथ में लिए, चुपचाप बैठा हुआ गहरी सोच में डूबा था। “साठ पार,” मैंने अपने आप से धीरे से कहा। ये शब्द गर्व और जिज्ञासा के एक अनोखे मिश्रण के साथ मेरी … Continue reading जीवन की नई परिभाषा