एक अप्रकाशित संस्मरण – फ़ोर स्टार्स – एक मनन

पिछले सप्ताह भारत ने वही किया, जिसे हम कभी अपनी जीवंतता कहते हैं और कभी अपनी कमज़ोरी – कुछ पंक्तियों को लेकर पूरे देश में तूफ़ान खड़ा हो गया। एक ऐसी किताब, जिसे अधिकतर नागरिकों ने अपने हाथों में कभी देखा भी नहीं, एक पत्रिका के अंशों के सहारे संसद के भीतर प्रवेश कर गई। … Continue reading एक अप्रकाशित संस्मरण – फ़ोर स्टार्स – एक मनन