आख़िरी पंख

“जब आख़िरी पंख गिरता है,और बाँधने वाला कोई धागा नहीं बचता,तो आत्मा, हल्की होकर, लौटना भूल जाती है।“ ज़िंदगी में कुछ पल ऐसे आते हैं जब दुनिया जैसे थोड़ी धीमी हो जाती है — ये नहीं कि वक़्त की रफ़्तार बदलती है, पर हमारे अंदर कुछ ऐसा होता है जो और गहराई से सुनने लगता … Continue reading आख़िरी पंख